
Note: 5-6 महीने पहले दुनिया भर में ही रहे Gen Z प्रोटेस्ट को लेकर एक यूट्यूब चैनल के लिए एक स्क्रिप्ट लिखी थी, समय निकल कर पढ़ सकते है । बहुत ही इंफॉर्मेटिव लेख है, आपको पसंद आयेगा। हाँ लेख बड़ा लग सकता है लेकिन बोरिंग बिल्कुल नहीं लगेगा इसकी गारंटी है।
Gen Z… ये शब्द सुनते ही आपके मन में क्या ख्याल आता है? एक ऐसी Generation जो Smartphone, Internet और Social Media के साथ बड़ी हुई? जिसके हाथों में हमेशा Smart Phone होता है… Insta Post, Reels, Shorts, Snap जिसकी जिंदगी है। दिन का बड़ा हिस्सा Reels की दुनिया में गुजारते हैं। Reality से कोशों दूर होते हैं। Career और Future की तो कोई टेंशन ही नहीं होती…। 8 घंटे से ज्यादा काम? No way! और Opinion? हमेशा रेडी…। But hold on… ये आपका सिर्फ एक Stereotype है…। Gen Z Social Media और Internet पर काफी ऐक्टिव रहते हैं, ये सच है। लेकिन Reality से वास्ता नहीं रखते, ये पूरी तरह गलत है। Gen Z एक Balance Life जीना पसंद करते हैं। वह Social Media और Internet पर ऐक्टिव भी रहते हैं… काम भी करते हैं... और पहाड़ों, नदियों, Beach को भी एक्सप्लोर करते हैं। Gen Z Smart हैं… Creative हैं… और सबसे बड़ी बात Socially Aware हैं। Freedom, Equality और अपने Rights को अच्छे से समझते हैं। सबसे Important… स्टैंड लेते हैं, फाइट करते हैं… और Change के लिए हमेशा रेडी रहते हैं। Gen Z वो Generation है, जो किसी भी मुद्दे पर… किसी के भी खिलाफ… बोलने से नहीं डरती… अंबानी का Vantara हो… Chhattisgarh-Bihar में लाखों पेड़ों की कटाई हो…, Adani को फायदे पहुंचाने का मुद्दा हो… Vote Chori हो या फिर गडकरी की Ethanol Blending….। बड़ी संख्या में Gen Z Influencers Facts और Proofs के साथ दमदारी से सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते दिखे हैं। सिर्फ यही नहीं, Competitive Exams में Corruption और Irregularities के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं। अभी लद्दाख में बड़ा Gen Z Protest हुआ… जो हिंसक हो उठा… और सरकार ने Sonam Wangchuk को गिरफ्तार कर लिया…। लेकिन Gen Z Protest दुनियाभर में हो रहे। श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल के बाद मेडागास्कर में Gen Z ने सत्ता को उखाड़ फेंका है। राष्ट्रपति को देश छोड़कर भागना पड़ा है। फ्रांस, इंडोनेशिया, केन्या, मोरक्को, पेरू, अमेरिका, सर्बिया, इटली, तिमोर-लेस्ते जैसे कई देशों में ऐसे Protest हो रहे हैं… जिन्हें Lead करने वाले Gen Z हैं…। और ज्यादातर सरकारों को झुकना पड़ा है। 2025 में इतने प्रोटेस्ट हो चुके हैं कि इसे The Year Of The Protest कहा जा रहा है…। सवाल है कि Gen Z आखिर इतने Rebellious क्यों हैं? नेपाल से लेकर मेडागास्कर तक क्यों बवाल मचा रखा है? इन प्रोटेस्ट की Common बात क्या है? क्या भारत में भी बड़े लेबल पर Gen Z प्रोटेस्ट देखने को मिलने वाला है?
Gen Z… 1997 से 2012 के बीच पैदा ऐसी पहली Generation… जो पूरी तरह Internet Age में पली-बढ़ी है। 1997 से पहले की Generation यानी Generation X और Millennials को लगता है कि Gen Z फोन एडिक्ट और आलसी है। और सेंसटिव इतना है कि छोटी-छोटी बातों पर Emotional और Offend हो जाता है। लेकिन Gen Z सिर्फ यही नहीं है। यह Creative है… Technology, Artificial Intelligence, Social Media, Tech Tools का माहिर खिलाड़ी है। Mental Health, Diversity और Social Justice को Priority देता है। Work-Life Balance पर फोकस करता है…। पुराने सिस्टम को चैलेंज करता है…। Socio-Political Issue पर खुलकर बोलता है। Viral Campaign, Memes और Hashtags के जरिए आवाज उठाता है। और किसी भी Issue को Local से National और National से Global बनाने का दम रखता है। Gen Z ने ये दम कई बार दिखाया है..। एशियाई Gen Z इस मामले में सबसे आगे हैं…। सिर्फ 2025 में बांग्लादेश, नेपाल, इंडोनेशिया, फिलीपींस, तिमोर-लेस्ते में बड़े पैमाने पर Gen Z Protest हुए हैं। 2022 में हुआ श्रीलंका का प्रोटेस्ट भी एक Gen Z Protest था..। श्रीलंका, बांग्लादेश, और नेपाल में तो Gen Zs ने सरकार को ही उखाड़कर फेंक दिया। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को देश छोड़कर भागना पड़ा..। लेकिन Gen Z Protest एशिया तक सीमित नहीं है। मोरक्को, पेरू, फ्रांस, सर्बिया और मेडागास्कर जैसे कई देशों के Gen Z… Corruption, Inequality, Unemployment, Education और Health जैसे मुद्दों पर मुखर हो रहे हैं। सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर रहे हैं। उनकी Responsibility और Accountability तय कर रहे हैं।
मेडागास्कर का Gen Z Protest सबसे ताजा है। मेडागास्कर की पब्लिक लंबे समय से Water Crisis और बिजली कटौती से जूझ रही थी। जिसके खिलाफ 10 सितंबर को Opposition Leaders क्लेमेंस राहारिनिरिना और फैनिर्य राकोटो आरिसोआ ने राजधानी एंटानानारिवो में Protest का कॉल दिया। प्रोटेस्ट धीरे-धीरे बढ़ता गया। तभी Facebook पर एक लीडरलेस ग्रुप “Gen Z Madagascar” तेजी से उभरा। ये इतनी तेजी से उभरा कि सिर्फ 5 दिन के अंदर 1 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स जुटा लिए। यह ग्रुप पूरे Protest की Backbone बन गया। Facebook, TikTok के जरिए पूरे देश को Mobilize करना शुरू कर दिया। फिर क्या था… 25 सितंबर से एंटानानारिवो की सड़कों पर पूरा मेडागास्कर उतर आया। “We Want to Live, Not Survive” जैसे स्लोगन्स गूंजने लगे। स्टूडेंट्स Equal Education, Health Care Reforms और नेताओं के बच्चों जितना मौका देने की मांग करने लगे। महंगाई और करप्शन पर भी लोगों का गुस्सा भड़क उठा। राष्ट्रपति एंड्री रजोएलिना को हटाने की मांग होने लगी। सरकार ने सख्ती दिखाई और सिक्योरिटी फोर्सेस ने टियर गैस, रबर बुलेट्स और AK-47 का इस्तेमाल किया। 25 सितंबर से 13 अक्टूबर तक 22 लोग मारे गए और 100 से ज्यादा घायल हुए। इन मौतों से प्रदर्शन रौद्र रूप लेता जा रहा था। फिर भी राष्ट्रपति राजोइलिना ने सत्ता बचाने की आखिरी कोशिश की..। 26 सितंबर को एनर्जी मिनिस्टर फायर किया, पर बात नहीं बनी…। 29 सितंबर को गवर्नमेंट को डिसॉल्व कर दिया और 6 अक्टूबर को मिलिट्री जनरल Ruphin Zafisambo को नया PM अपॉइंट किया, लेकिन प्रोटेस्टर्स ने रिजेक्ट कर दिया। तभी अचानक 11-12 अक्टूबर को आर्म्ड फोर्सेस ने प्रोटेस्टर्स को सपोर्ट कर दिया। सेना की सबसे ताकतवर यूनिट CAPSAT के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को ज्वाइन कर लिया। राजोइलिना ने मेडागास्कर की शांति और एकता का आह्वान किया और बातचीत का प्रस्ताव दिया…। लेकिन Gen Z ने इसे भी रिजेक्ट कर दिया। सैनिकों के प्रोटेस्ट ज्वॉइन करने के बाद Gen Z प्रोटेस्टर्स को रोकना मुश्किल था। फिर आया क्लाइमेक्स का दिन… 13 अक्टूबर…. रजोएलिना फ्रेंच मिलिट्री एयरक्राफ्ट से देश छोड़कर भाग गए। जानकारी के मुताबिक, रजोएलिना फ्रांस की मदद से भागने में सफल रहे। उनकी लोकेशन अबतक डिस्क्लोज्ड नहीं है, लेकिन कई रिपोर्ट्स में उनके दुबई में होने की पुष्टि हुई है। रजोएलिना के भागने के बाद 14 अक्टूबर को नेशनल असेंबली ने उन्हें इम्पीच किया। और कर्नल माइकल रैंड्रियनिरिना को राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई।
मेडागास्कर का Gen Z Protest नेपाल के Gen Z Protest से Inspired था। नेपाल का Protest ऐसा पहला प्रोटेस्ट था, जिसे Gen Z Protest का नाम दिया गया। नेपाल का Gen Z Protest 4 सितंबर को शुरू हुआ, जब सरकार ने Social Media Platforms पर बैन लगा दिया। लेकिन Gen Zs गुस्सा सिर्फ Social media बैन के खिलाफ नहीं था। ये गुस्सा Corruption, nepotism और आर्थिक असमानता के खिलाफ था। नेपाल में भारी गरीबी है, लोगों के पास खाने के पैसे नहीं, लेकिन Politician के बच्चे Luxury Life जी रहे थे। वो भी टैक्सपेयर्स के पैसों पर…। Gen Z का गुस्सा भड़क उठा… लोग सड़कों पर आ गए…। 8 सितंबर को पुलिस की गोलीबारी में 19 Gen Z मारे गए, जिससे प्रोटेस्ट हिंसक हो उठा। 9 सितंबर को गुस्सैल भीड़ ने सरकारी भवनों, पार्टी ऑफिसेस और होटलों को आग लगा दी। कुल 74 लोगों की मौतें हुईं। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को मजबूरन 9 सितंबर को इस्तीफा देना पड़ा। 12 सितंबर को Gen Zs के ऑनलाइन पोल से सुशिला कार्की Interim PM बनीं।
बांग्लादेश में भी जून 2024 में नेपाल जैसा ही प्रोटेस्ट देखने को मिला था। जब सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में Freedom Fighters के बच्चों के लिए 30% कोटा बहाल किया था। Students Against Discrimination ग्रुप यानी SAD ने ढाका यूनिवर्सिटी से अपना प्रोटेस्ट शुरू किया। Students Against Discrimination मेरिट बेस्ड Jobs की मांग कर रहा था। प्रोटेस्ट को लीड करने वाले Gen Z ही थे, लेकिन प्रोटेस्ट को Gen Z Protest का नाम नहीं दिया गया था। प्रोटेस्ट 3 जुलाई तक शांतिपूर्ण था, लेकिन 10-11 जुलाई को शेख हसीना की स्टूडेंट विंग Chhatra League और पुलिस ने Anti-Quota Protesters पर अटैक कर दिया। Chhatra League ने ढाका यूनिवर्सिटी, राजशाही यूनिवर्सिटी, चट्टोग्राम यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स पर रॉड्स, स्टिक्स और रिवॉल्वर्स से अटैक किया। हमले में 300 से ज्यादा घायल हुए, 2 स्टूडेंट्स की मौत की खबर आई। सोशल मीडिया पर Justice For Students और Quota Reform हैशटैग ट्रेंड करने लगा। लेकिन 17 जुलाई को प्रोटेस्ट और हिंसक हो गया। ढाका यूनिवर्सिटी में पुलिस और Chhatra League ने प्रोटेस्टर्स पर टियर गैस और रबर बुलेट्स के साथ फायरिंग की, जिसमें 400 से ज्यादा लोग घायल हुए। इन हमलों ने प्रोटेस्ट के पक्ष में मोबलाइजेशन और तेज कर दिया। SAD ने 18 जुलाई को नेशनवाइड जनरल स्ट्राइक का कॉल दिया। ढाका, चट्टोग्राम, और सिलहट में सड़कों पर लाखों लोग उतरे। पुलिस-Chhatra League और प्रोटेस्टर्स के बीच भयंकर हिंसक झड़पें हुईं..। 200 से ज्यादा लोग मारे गए, सैंकड़ों घायल हुए। प्रोटेस्टर्स ने कोटा खत्म करने के साथ-साथ शेख हसीना की रिजाइनेशन की मांग शुरू कर दी। SAD और दूसरे ग्रुप्स ने Non-Cooperation Movement लॉन्च किया। ढाका सहित दूसरे शहरों में Civil Disobedience ने इकोनॉमी को ठप कर दिया। प्रोटेस्टर्स अब आवामी लीग के दफ्तरों और शेख हसीना के पीएम हाउस को घेरने की प्लानिंग बनाने लगे। 5 अगस्त को लाखों प्रोटेस्टर्स ने ढाका में गणभवन को घेर लिया। लेकिन प्रदर्शनकारियों के पीएम हाउस पहुंचने से पहले ही शेख हसीना पीएम पद से इस्तीफा देकर आर्मी हेलिकॉप्टर से भारत भाग आईं। जिसके बाद स्टुडेंट्स ने नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस को Interim Government का हेड बना दिया।
मार्च 2022 में श्रीलंका में भी सेम पैटर्न देखा गया था। श्रीलंका भंयकर Economic Crisis से जूझ रहा था। पेट्रोल, खाना, और दवाइयों की कमी, 12-12 घंटे की बिजली कटौती, और 50% से ज्यादा महंगाई ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया था। तभी Gen Zs ने राजपक्षे परिवार के खिलाफ आवाज उठाना शुरू किया। Go Home Gota और Go Home Rajapaksa हैशटैग्स से फेसबुक, X, और इंस्टाग्राम पर कैंपेन वायरल होने लगे। 31 मार्च 2022 से कोलंबो के गाले फेस ग्रीन पर हजारों लोग इकट्ठा हुए। उन्होंने इसे सिर्फ विरोध का मैदान नहीं, बल्कि टेंट लगाकर एक Mini Community Hub बना दिया। टेंट्स सोने के साथ-साथ डिस्कस और प्लानिंग करने की जगह बन गई। प्रोटेर्सटर्स ने लाइव स्ट्रीमिंग, मीम्स, और रील्स के जरिए पब्लिक को मोबलाइज करना शुरू किया। कोलंबो, कैंडी, गाले जैसे शहरों में भी प्रोटेस्ट्स होने लगे। सरकार ने 3-4 अप्रैल को कर्फ्यू और सोशल मीडिया बैन की कोशिश की, लेकिन जेन जी ने VPN और व्हाट्सएप से मूवमेंट जारी रखा। 17 अप्रैल 2022 को गाले फेस ग्रीन पर 50,000 से ज्यादा लोग जमा हुए, लेकिन गोटाबाया ने इस्तीफे से इनकार कर दिया। मई तक प्रोटेस्ट और तेज हो गया। सरकार ने डायलॉग की पेशकश की, लेकिन प्रोटेस्टर्स ने रिजेक्ट कर दिया। 6 मई को यूनियन्स ने नेशनवाइड हड़ताल का कॉल दिया, इकोनॉमी पूरी तरह ठप हो गई। प्रोटेस्टर्स PM हाउस और प्रेसिडेंट हाउस के बाहर मार्च निकालने लगे। सरकार ने इमरजेंसी घोषित कर दी। 9 मई को माहौल हिंसक हो गया। राजपक्षे समर्थकों ने गाले फेस ग्रीन और अन्य प्रोटेस्ट साइट्स पर लाठियों, पत्थरों और हथियारों से हमला किया। जिसके बाद प्रोटेस्टर्स ने भी जवाबी हमले किए। एक सांसद सहित 5 लोगों की मौत हो गई, सैकड़ों लोग घायल भी हुए। भारी दबाव के बीच 9 मई 2022 को महिंद्रा राजपक्षे ने पीएम पद से इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद 12 मई 2022 को रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। लेकिन प्रोटेस्टर्स नहीं रुके। 9 जुलाई 2022 को लाखों लोगों ने प्रेसिडेंट हाउस घेर लिया। पुलिस और प्रोटेस्टर्स के बीच हिंसक झड़प हुई। करीब 30-40 लोग घायल हुए, लेकिन प्रोटेस्टर्स नहीं रुके। वे प्रेसिडेंट हाउस के अंदर घुसने लगे.. और देखते ही देखते प्रेसिडेंट हाउस पर कब्जा कर लिया। हालांकि गोटाबाया राजपक्षे सुरक्षित स्थान पर जा चुके थे। प्रोटेस्ट्स और भारी दबाव के कारण गोटाबाया ने 13 जुलाई 2022 को श्रीलंका छोड़कर मालदीव की उड़ान भरी। 14 जुलाई 2022 को मालदीव से सिंगापुर पहुंच गए। और वहीं से अपना इस्तीफा भेज दिया। गोटाबाया के इस्तीफे के बाद रानिल ने Interim President की भूमिका संभाली और 20 जुलाई 2022 को पूर्ण रूप से राष्ट्रपति चुने गए।
इंडोनेशिया में भी ऐसा ही देखने को मिला…। 20 मार्च को इंडोनेशियाई संसद ने आर्म्ड फोर्स लॉ में संशोधन पास किया, जिसे युवाओं ने बेरोजगारी बढ़ाने वाला माना। Students Unions ने जकार्ता, बांडुंग, और सुराबाया में छोटे-मोटे मार्च शुरू किए। टिकटॉक और इंस्टाग्राम पर Indonesia Cemas हैशटैग ट्रेंड करने लगा। लेकिन सांसदों का हाउसिंग अलाउंस ढाई लाख रुपये प्रति माह करने के कदम ने आग में घी डाल दिया। Gen Zs ने इसे corruption और inequality का प्रतीक माना। सोशल मीडिया के जरिए मोबलाइज लाखों Gen Zs सड़क पर उतर आए। 5 जुलाई को जकार्ता में 10,000 से ज्यादा लोग जुटे। पुलिस ने टियर गैस और वॉटर कैनन यूज किए, 50 से ज्यादा लोग घायल हुए। 20 जुलाई को प्रोटेस्टर्स ने सरकार को डिमांड्स की लिस्ट दी, आर्म्ड फोर्स लॉ रद्द करना, सांसदों के भत्ते खत्म करना, करप्शन पर क्रैकडाउन, और मेरिट-बेस्ड जॉब्स। मांगें पूरी न होने पर 25 अगस्त को जकार्ता के बाहर मास प्रोटेस्ट हुआ। प्रोटेस्टर्स और पुलिस के बीच झड़प देखने को मिली। 28 अगस्त को पुलिस की गाड़ी से कुचलने से डिलीवरी राइडर अफ्फान कुर्नियावन की मौत हो गई, जिससे Gen Zs भड़क गए..। प्रोटेस्टर्स आगजनी, लूटपाट और सरकारी बिल्डिंग्स को आग के हवाले करने लगे…। 7 लोग मारे गए जबकि सैंकड़ों घायल हुए… और 3 हजार से ज्यादा गिरफ्तार हुए। दबाव बढ़ने पर 31 अगस्त को राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने सांसदों के भत्ते रद्द किए, सरकारी खर्चों को कम करने वादा किया और 5 मंत्रियों को बर्खास्त भी किया। जिसके बाद धीरे-धीरे प्रोटेस्ट शांत हो गए।
ठीक इसी तरह फिलीपींस में भी Gen Z Protest शुरू हुए। फिलीपींस में हर साल दर्जनों तूफान आते हैं। अभी जुलाई में राजधानी मनीला में भयंकर बाढ़ आई, जिसमें कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई और करीब 2 लाख 70 हजार लोगों को विस्थापित होना पड़ा।
बाढ़ से मची तबाही से लोग उबर भी नहीं पाए थे कि 33 अरब डॉलर के फ्लड कंट्रोल प्रोजेक्ट घोटाले का खुलासा हुआ। घोटाले में कई घोस्ट प्रोजेक्ट्स का खुलासा हुआ, यानी कई प्रोजेक्ट्स जो सिर्फ कागजों पर दर्ज थे। जो प्रोजेक्ट्स धरातल पर उतरे, वे भी घटिया से घटिया निर्माण वाले थे। प्रोजेक्ट्स में ओवर बिलिंग की गई, पॉलिटकल फैमिलीज और कांट्रैक्टर्स को करोड़ों डॉलर्स का फायदा पहुंचाया गया। बाढ़, गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक असामनता का दंश झेल रहे Gen Zs का गुस्सा भड़क उठा। 4 सितंबर को क्वेजॉन सिटी में प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रोटेस्ट को लीड करने वाले Gen Z थे। टिकटॉक, फेसबुक और रेडिट पर कैंपेन चलाया… नेताओं के भ्रष्टाचार और फिजूलखर्ची को उजागर किया। 21 सितंबर को मनीला मनीला के रिजल पार्क और क्यूजॉन सिटी में 1 लाख 30 हजार लोग जुटे। दोपहर तक सबकुछ शांतिपूर्ण था। लेकिन दोपहर बाद हिंसा भड़क उठी। सैंकड़ों घायल हुए, और 200 से ज्यादा गिरफ्तारियां भी हुईं। मास प्रोटेस्ट ने सरकार पर दबाव बनाया। फ्लड कंट्रोल प्रोजेक्ट्स स्कैम के आरोपी प्रेसिडेंट मार्कोस के चचेरे भाई मार्टिन रोमुअल्डेज को स्पीकर पद से इस्तीफा देना पड़ा। प्रेसिडेंट मार्कोस जूनियर ने कहा कि अगर मैं राष्ट्रपति न होता, तो सड़कों पर corruption के खिलाफ march कर रहा होता। और अकाउंटेबिलिटी का वादा किया। DPWH सेक्रेटरी विन्स डिजॉन ने जांच और फंड रिकवरी का ऐलान किया। जिसके बाद धीरे-धीरे प्रोटेस्ट शांत होते गए।
एशियाई देशों से शुरू Gen Z Protest पूरी दुनिया में फैल रहा है। नेपाल, मेडागास्कर जैसे देशों में जहां तख्तापलट हुआ, वहीं इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे देशों में सरकारों को झुकना पड़ा। दुनियाभर में हो रहे इन Gen Z Protest काफी समानताएं हैं। पहला, इन्हें लीड करने वाले Gen Z हैं। दूसरा इनके मुद्दे बेहद कॉमन हैं जैसे Unemployment, Corruption, आर्थिक असमानता, सरकार के बेलगाम खर्चे, महंगाई Social Justice, बिजली-पानी और मूलभूत सुविधाएं…। तीसरा इनका सबसे बड़ा हथियार सोशल मीडिया है। इंस्टाग्राम, फेसबुक, टिकटॉक और रेडिट से कैंपेन चलाते हैं। मीम्स और रील्स से मैसेजेज फैलाते हैं और लोगों को मोबलाइज करते हैं। बैन के बावजूद टेक्नोलॉजी का सही यूज करते हैं और प्रोटेस्ट को धारदार बनाते हैं। एक और चीज जो कॉमन है वह है One Piece फ्लैग…। नेपाल से लेकर मेडागास्कर तक अधिकांश प्रोटेस्ट में ये झंडा इनकी लड़ाई का प्रतीक बना हुआ है। One Piece फ्लैग जापानी मंगा और एनिमे सीरीज के एक काल्पनिक समुद्री डाकुओं के समूह Straw Hat Pirates का झंडा है। इसमें पात्र भ्रष्ट सरकारों के खिलाफ लड़ते हैं।
मेलबर्न विश्वविद्यालय की सीनीयर प्रोफेसर अनीसा आर. बीटा कहती हैं कि जेन ज़ी और जेन अल्फा जैसी युवा पीढ़ियां अब सिर्फ एक करिश्माई नेता के पीछे नहीं चलना चाहतीं। वे ऐसे Decentralized movement के साथ सहज है जो अपने लक्ष्यों पर पूरी तरह केंद्रित रहता है।
नेपाल के संगीतकार और युवा नेता रजत दास श्रेष्ठ Gen Z Protest के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। उनका मानना है कि नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और दूसरे एशियाई देशों में विरोधों की जड़ें समान हैं। भ्रष्टाचार और सरकारों का तानाशाही रवैया सिर्फ नेपाल या बांग्लादेश की समस्या नहीं है; यह पूरे क्षेत्र में विभिन्न रूपों में मौजूद है। पूरे एशिया में एक पैटर्न बन रहा है। नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका ने स्पष्ट संदेश दिया कि“जब युवा उठते हैं, तब सरकारें गिर सकती हैं।” अगर गवर्मेंट युवाओं के सपनों और नाराज़गी की अनदेखी जारी रखते हैं, तो अन्य देशों में भी समान घटनाएँ होंगी।
सवाल उठता है, क्या भारत में भी मास Gen Z Protest देखने को मिल सकते हैं? लद्दाख में Gen Z Protest का छोटा सा गुबार तो देखने को मिल चुका है। अडानी को एक रुपये में हजारों एकड़ जमीन देने का मामला हो.. BSNL द्वारा अंबानी की जिओ कंपनी का सैंकड़ों करोड़ का बिल बनाना भूल जाना हो… बाबा रामदेव को फर्जी दवाएं बेचने देने, जमीन हड़पने देने की खुली छूट देने का मामला हो.. ऐसे बहुत से मामले हैं, जिसमें मोदी सरकार पर Corruption के आरोप लगते रहे हैं। भारत में बेरोजगारी पीक पर है। Unemployment और प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता और धांधली के खिलाफ स्टुडेंट्स सड़क पर उतरते रहे हैं। सरकार विज्ञापनों और पब्लिसिटी स्टंट पर टैक्सपेयर्स के हजारों करोड़ बेलगाम खर्च कर रही है। लोगों का खर्चा तो बढ़ रहा है, लेकिन आमदनी नहीं बढ़ रही है। अमीर और अमीर होते जा रहे और गरीब और गरीब होते जा रहे हैं। दलितों-आदिवासियों और मुसलमानों के खिलाफ अत्याचार बढ़ा है। प्रधानमंत्री मोदी पर वोटचोरी और गलत तरीके से चुनाव जीतने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। लेकिन हिंदुत्ववादी राजनीति ने अबतक इसे बैलेंस कर रखा है।
लद्दाख प्रोटेस्ट पर Political और Defense Analyst M A हुसैन का कहना है कि अगर भारत का शीर्ष नेतृत्व सोचता है कि लद्दाख का असंतोष केवल ठंडे रेगिस्तानी पठार तक सीमित रहेगा, तो यह गलतफहमी है। Gen Z की शिकायतें नैशनल हैं। बेरोज़गारी लगातार उच्चतम स्तर पर है, Political Culture युवाओं को अक्सर बाहर का महसूस कराती है। लद्दाख जैसा असंतोष देश भर में फेल सकता है।




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