नीरव मोदी के साढ़े तेरह हज़ार करोड़ के घोटाले की ऐसी सच्चाई कोई नहीं बताएगा !

22 जनवरी 2018… प्रधानमंत्री मोदी वल्ड इकोनॉमक फोरम की समिट में शामिल होने स्विट्जरलैंड पहुंचते हैं। और अगले ही दिन यानी 23 जनवरी को भारतीय CEOs से मुलाकात करते हैं। इस मुलाक़ात की एक ग्रुप फोटो बाहर आती है और बवाल मच जाता है। क्योंकि ग्रुप फोटो में एक ऐसा शख्स मौजूद था जो देश का साढ़े तेरह हज़ार करोड़ रुपया लूटकर रफूचक्कर हो चुका था यानी विदेश भाग चुका था।

लुटेरे बिजनेसमैन की फोटो प्रधानमंत्री मोदी के साथ देख देश के सबसे बड़े बैंकों में से एक पंजाब नेशनल बैंक के हेडक्वॉटर में हलचल मच जाती है। अधिकारियों को समझ नहीं आता कि आख़िर करें तो करें क्या…! फिर आता है 14 फरवरी 2018 का दिन, जब पीएनबी के अधिकारी बड़ी हिचक के साथ एक खुलासा करते हैं। बताते हैं की नीरव मोदी नाम का मशहूर हीरा व्यापारी नीरव मोदी और उसका मामा मेहुल चौकसी देश का साढ़े तेरह हज़ार करोड़ रुपए लेकर फरार हो चुका है।

हजारों करोड़ के लूट के इस खुलासे के बाद कांग्रेस प्रधानमंत्री मोदी पर शाह देकर विदेश भागने का आरोप लगाया। इसी बीच पीएम मोदी का 5 नवंबर 2015 एक वीडयो भी वायरल होने लगा। वीडयो में प्रधानमंत्री, मेहुल चोकसी को “मेहुल भाई” कहकर संबोधत करते दिखाई देते है।

इन सभी घटनाक्रमों के बीच इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट ने कुछ सीरियस allegations लगाए और कुछ गंभीर सवाल खड़े किए। रिपोर्ट के मुताबिक, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट 8 महीने पहले ही नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के स्कैम का पता चल चुका था। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 10,000 पन्नों की रिपोर्ट बनाई थी, जिसमें नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की कंपनियों की फ़र्ज़ी खरीददारी का पूरा ब्योरा था, कि कैसे उन्होंने अपने स्टॉक्स का वैल्युयेशन बढ़ा चढ़ाकर दखाया कैसे रिलेटिव्स को सस्पीशयस पेमेंट की गई, कैसे ड्यूबयस लोन का खुलासा हुआ, ये सबकुछ उस रिपोर्ट में लिखा हुआ था, लेकन इस रिपोर्ट को CBI, ED, SFIO या DRI किसी के भी साथ श्री नहीं किया गया। जबकि REIC Mechanism के थ्रू ऐसी रिपोर्ट्स शेयर करना कंपल्सरी है। कई बार सरकार को नीरव मोदी के ख़िलाफ़ ऐक्शन लेने के मौके मिले लेकिन कोई ऐक्शन नहीं लिया गया।

कहानी में एक एंट्री और होती है- एस.वी. हर प्रसाद। वही हरी प्रसाद जिन्होंने नीरव मोदी पर शोरूम की फ़्रेंचायज़ी देने के नाम पर 10 करोड़ रुपए की ठगी करने का आरोप लगाया था। अपने साथ हुए इस घोटाले की जानकारी हरी प्रसाद ने जुलाई 2016 को प्रधानमंत्री कार्यालय भी भेजी। प्रसाद ने लेटर में इस बात को अंडरलाइन किया था कि “नीरव बहुत बड़ा घोटाला कर रहा है। इस पर तुरंत कारवाई की जाए, अगर इसमें देरी हुई तो विजय माल्या की तरह यह भी देश छोड़कर भाग जाएगा।” लेकिन कोई ऐक्शन नहीं लिया गया। करोड़ों बर्बाद करने के बाद भी भारत सरकार उसे अबतक भारत नहीं लेकर आ पाई है। तो कौन है नीरव मोदी? क्या था उसका बिज़नेस मॉडल? कैसे उसने पीएनबी को साढ़े 13 हजार करोड़ का चूना लगाया? आइये जानते हैं नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी के साढ़े तेरह हज़ार करोड़ के घोटाले की पूरी कहानी क्या है?

नीरव मोदी की जर्नी काफी दिलचस्प है। अमेरिका की व्हार्टन जैसी टॉप यूनिवर्सिटी छोड़कर डायमंड ट्रेड में अपना नाम बनाना कोई आसान बात नहीं है। लेकिन नीरव मोदी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर 19 साल की उम्र में ही अपने मामा मेहुल चोकसी के बिज़नेस में शामिल हो गया। मेहुल चौकसी उस समय गीतांजली ग्रुप का हेड था, जिसके देशभर में करीब 4000 ज्वेलरी स्टोर्स थे। यहीं से नीरव मोदी ने डायमंड इंडस्ट्री के सारे दांव-पेंच सीखे। कुछ सालों बाद 1999 में उसने अपनी खुद की कंपनी Firestar शुरू की, जो डायमंड सोर्सिंग और ट्रेडिंग का काम करती थी। बिज़नेस सफल हुआ तो उसने कई और ज्वैलरी कंपनियों को एक्वॉयर भी किया। 2010 में नीरव मोदी ने अपने नाम से पहला डायमंड बुटीक लॉन्च किया। और देखते ही देखते दुनियाभर में उसके 16 स्टोर खुल गए जो दुनिया की सबसे फ़ेमस और बड़ी सिटी मानी जाती हैं। दिल्ली, मुंबई, न्यूयॉर्क , हांगकांग, लंदन, मकाऊ तक। नीरव पूरी दुनया में तब फेमस हुआ जब उसने Golconda Lotus Necklace तैयार किया, जिसमें 12 कैरेट का विंटेज पेयर शेप डायमंड लगा था। उसने 36 व्हाइट डायमंड वाला 88.88 कैरेट का Riviere of Perfection भी डिज़ाइन किया। इन दोनों

ही डीजाइन्स को Sotheby’s के ऑक्शन में बेचा गया। इसी साल नीरव मोदी ऐसा पहला ज्वैलर बना जिसकी डिज़ाइन को Christie’s और Sotheby’s जैसे बड़े इंटरनेशनल ऑक्शन हाउस ने अपनी कैटलॉग की कवर इमेज पर जगह दी। किसी भी ज्वैलर के लिए ये बहुत बड़ी बात होती है। नीरव मोदी की ख्वाहश थी कि वो Cartier, Harry Winston और Van Cleef & Arpels जैसी इंटरनेशनल लग्जरी ब्रांड्स को टक्कर दे। कुछ हद तक उसने इसे पूरा भी किया। जब Kate Winslet ने Oscar की रेड कार्पेट पर नीरव मोदी की डिज़ाइंड ज्वैलरी पहनी तो सबकी आंखें उसी पर टकी रहीं। लेकन ये चमक उस वक्त फीकी पड़ गई जब उसका फ्रॉड बाहर आ गया। उसकी कहानी शाइन से स्कैंडल में बदल गई।

पीएनबी घोटाला दुनिया के सामने 2018 में आया, लेकन इसकी बुनयाद रखी गई 2011 में। नीरव मोदी ने फ्रॉड के लिए बैंकिंग सस्टम के एक खास लूपहोल्स का फायदा उठाया। लूपहोल का नाम है Letter of Undertaking यानी LOU । LOU एक तरह की बैंक गारंटी होती है। जब कोई बिजनेसमैन विदेश से माल खरीदना चाहता है, तो वदेशी बैंक को भरोसा चाहए होता है कि उसका पैसा वापस मिल जाएगा। ऐसे में इंडियन बैंक्स LOU जारी करते हैं कि अगर हमारा कस्टमर पैसे नहीं चुकाएगा, तो हम चुकाएंगे। इसी आधार पर विदेशी बैंक उस बिजनेसमैन को शॉट-टर्म क्रेडिट या लोन देता है। आमतौर पर LOU बड़े बिजनेसमैन और इंपोर्ट्स.. खासतौर पर डायमंड-ज्वैलरी सेक्टर में इसका ज्यादा इस्तेमाल होता है। लेकिन LOU पाना इतना भी आसान नहीं है। इसके लिए डॉक्युमेंट सिब्मट करने होते हैं। वेरफकेशन होता है। कोलेटरल जमा करना होता है, ताकि पैसा न चुका पाने पर कोलेटरल बेचकर भरपाई की जा सके। नीरव मोदी का काम डायमंड इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का था। उसे भी फॉरेन करेंसी में डील करना पड़ता था। इसके लिए उसे इंडियन बैंकों की फॉरेन ब्रांच से लोन लेना पड़ता था, जहां इंटरेस्ट रेट भी कम मिलता था। लेकिन दिक्कत ये थी क इन लोना के बदले कोलैटरल क्या दिया जाए? 2010 में नीरव मोदी ने मुंबई के काला घोड़ा में एक स्टोर खोला। स्टोर से कुछ ही दूरी पर पीएनबी की ब्रैडी हाउस ब्रांच थी। जहां मार्च में फॉरेन एक्सचेंज डिपार्टमेंट में एक नया डप्टी मैनेजर आता है… गोकुल नाथ शेट्टी। इसी समय यहां मनोज खरत नाम का एक क्लर्क भी काम करता था। गोकुल नाथ का काम LOU को अप्रूवकरना था। और मनोज खरत SWIFT मैसेजिंग का काम देखता था। नीरव मोदी इन दोनों से नजदीकयां बढ़ाता है। और कुछ ही महीने के अंदर दोनों के बीच हेराफ़ेरी की सेटिंग फिक्स हो जाती है। नीरव मोदी गोकुलनाथ और मनोज खरत से कहता है कि हम तुम्हें मोटी रकम देंगे। बहुत पैसा कमवाएंगे। तुम्हें करना क्या है कि मेरी कंपनी से तुम्हारे पास LOU की रक्वेस्ट आएगी। उसे बना कोई सेक्योरटी मांगे अप्रूव कर देना है। दोनों शुरू में रूल्स रेगुलेशन्स के डर से आनाकानी करते हैं, लेकिन बाद में मान जाते हैं। अब इसके बाद क्या होता है कि मार्च 2011 को नीरव अपनी क कंपनी डायमंड R US के थ्रू LOU के लिए अप्लाई करता है। LOU रिक्वेस्ट में कहता है कि उसे हांगकांग से पल्स इम्पोर्ट करना है, जिसके लिए उसे लोन की जरूरत है। पीएनबी इसके लिए एक LOU जारी कर दे, ताकि हान्गकांग में लोन मल सके। सेट्टी और खरत दोनों सेट थे,बस कागजी कारवाई करनी थी। शेट्टी और खरत ने वही किया जैसा तय हुआ था। उसने बिना किसी कोलेटरल के LOU को अप्रूव कर दिया। इसके बाद शुरू हुआ हेराफेरी का वो सलसला शुरू हुआ जो साढ़े तेरह हजार करोड़ के घोटाले पर खत्म हुआ।

आम तौर पर LOU तभी दिया जाता है, जब कस्टमर के पास उस बैंक में पक्का कोलेटरल जमा हो। लेकिन नीरव मोदी एक के बाद एक सैंकड़ों करोड़ के LOU की रिक्वेस्ट भेजता गया। गोकुलनाथ उसे बिना किसी कोलेटरल के अप्रूव करता गया और पीएनबी के टॉप ऑफीसयल्स की नजर तक नहीं गई। नजर जाती भी कैसे? दरअसल, इन LOUs पर नीरव मोदी विदेश से जो लोन ले रहा था, वो शॉट-टर्म थे। मतलब तय तारीख पर उन्हें वापस करना जरूरी था। लेकिन जब पेमेंट का वक्त आया, तो नीरव मोदी ने पैसा लौटाने के बजाय एक और नया LOU बनवा लया, वो भी पहले वाले से ज्यादा कीमत का। नया लोन लेकर पुराने लोन का पेमेंट… और बची हुई रकम फिर से बिजनेस में लगा दी जाती। 2018 तक नीरव मोदी कुल 1,212 ऐसे LOU ले चुका था। इन LOUs की मदद से नीरव मोदी ने जिस बिजनेस को 20 साल में ग्रो होना था, उसे सिर्फ 5 साल में ही आसमान पर पहुंचा दिया। नीरव मोदी का प्लान था कि जब कंपनी सुपर सक्सेसफुल दिखेगी, तो उसे स्टॉक मार्केट में लिस्ट कर देगा। और कंपनी के शेयर प्रीमयम पर बेचकर जो पैसा आएगा, उससे ये अरबों रुपये का क़र्ज़ चुका दिया जाएगा। हेराफ़ेरी पीएनबी के टॉप ऑफीसयल्स की पकड़ में न आए, इसके लिए गोकुलनाथ शेट्टी और मनोज खरत ने नीरव मोदी के LOUs को PNB के Core Banking System यानी CBS में एंटर ही नहीं करते थे। CBS वो सिस्टम है जिसमें बैंक अपने सभी ट्रांज़ैक्शन का रिकॉर्ड रखता है। कई जगह तो एंट्री करते समय असली रकम की जगह कम अमाउंट रखा गया, ताकि शक न पैदा हो। ये सारा खेल शेट्टी और मनोज खरत ने SWIFT सिस्टम का इस्तेमाल करके किया।SWIFT एक ग्लोबल मैसेजिंग नेटवर्क होता है, जिसके ज़रिए बैंक आपस में तेजी से और सुरक्षा के साथ फाइनेंशयल इन्फॉमशन शेयर करते हैं जैसे LOU भेजना। लेकन समस्या ये थी कि स्विफ्ट का कोई कनेक्शन CBS से नहीं था। यानी जो मैसेज SWIFT पर भेजा जा रहा था, उसकी CBS में ऑटोमैटक एंट्री नहीं होती थी। नीरव मोदी ने इसी लूपहोल का फायदा उठाया। हमेशा की तरह नीरव मोदी ने 2018 में एक बार फिर अपनी कंपनियों diamonds R Us, Solar Exports और Stellar Diamonds के ज़रिए 323 करोड़ रुपये के LOU के लिए अप्लाई किया। लेकिन उसे पता नहीं था कि उसका बैठाया मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी 31 मई 2017 को ही रिटायर्ड हो चुका है। और उसकी जगह एक नया मैनेजर दिनेश भारद्वाज आया है। हमेशा की तरह नीरव मोदी के ऑफीसयल्स बैंक से LOU मांगते हैं। नियम के मुताबिक दिनेश भारद्वाज नीरव की कंपनी से कोलेटरल मांगते हैं। कहते हैं क 100% कैश मार्जिन दो, तभी LOU मिलेगा। इसपर नीरव मोदी के ऑफीसयल्स भड़क जाते हैं। कहते हैं कि हमने पहले भी LOUs लिए हैं, उस समय तो हमें बना किसी कोलैटरल के ही LOU मिल जाता था, अब अचानक नियम कैसे चेंज कर दिए? दिनेश भारद्वाज को शक हुआ। उसने अपने रिकॉड्स में चेक किया। भारद्वाज के पैरों तले जमीन खसक गई…। क्योंकि नीरव की कंपनियों को सैंकड़ों करोड़ के LOUs बना किसी कोलेटरल के ही बांट दिए गए थे और CBS में उसकी एंट्री तक नहीं की गई थी। PNB बैंक बिना किसी सिक्योरिटी के हजारों करोड़ रुपये का गारंटर बन चुका था। दिनेश भारद्वाज ने इस बारे में जब अपनी हायर अथॉरटी को इन्फॉर्म किया तो हड़कंप मच गया। इंक्वायरी बैठायी गई तो शुरुआती जाँच में करोड़ की गड़बड़ी तुरंत पकड़ में आ गई। रिटायर्ड मैनेजर शेट्टी क्लर्क मनोज खरत और नीरव मोदी की साठगांठ भी सामने आ गई। PNB ने अपनी गलती सुधारने के लिए जो भी हो सकता था किया…। नीरव मोदी की कंपनियों को बोला कि जो भी पेंडिंग लोन है उसे तुरंत क्लियर करो जिसका भी इंपोर्ट किया है उसके डॉक्यूमेंट्स सबमिट करो लेकिन PNB का लोन चुकाने का इरादा नीरव मोदी का था ही नहीं…। वह खुलासे से डेढ़ महीने पहले ही 1 जनवरी 2018 को लंदन भाग चुका था। जब PNB नीरव मोदी की कंपनियों को लोन चुकता करने के लिए कह रही थी। नीरव मोदी स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की समिट में पीएम मोदी के साथ फोटो खींचा रहा था।

मामला पीएनबी के हाथ से निकल चुका था। थक-हारकर PNB ऑफीसयल्स ने यह बात 29 जनवरी 2018 को RBI को बताई। 14 फरवरी 2018 को PNB ऑफीसयल्स ने ये बात स्टॉक एक्सचेंज और जनता को बताई। कहा कि हमने अपने बैंकिंग सिस्टम में करीब 11 से 12 हजार करोड़ रुपये की फ्रॉड ट्रांजैक्शन्स पकड़ा है। इसके साथ ही सीबीआई के पास नीरव मोदी और उसकी कंपनियों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई। और नीरव मोदी के जितने भी एसोसिएटेड अकाउंट्स थे उन सबको फ्रीज कर दया। पीएनबी के एम्प्लॉइज जिनपर शक था उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। सीबीआई की शुरूआती जांच में सामने आया कि नीरव मोदी के मैनेजर के पास PNB के इललीगल ऐक्सेस भी थे। उनके पास Swift सस्टम के लॉग इन पासवड्स तक थे, जिससे वो Swift सिस्टम पर अपने LOUs को खुद ही वेरीफाई और ऑथराइज कर लेते थे। और हर एक LOU के बदले PNB शेट्टी और खरत जैसे ऑफिसर्स को कमीशन मिल जाता था। सीबीआई ने जब डीप में जाकर जांच किया तो पता चला कि ये सब तो बहुत प्री प्लांड तरीके से किया जा रहा था। इसके बाद 4 फरवरी 2018 को सीबीआई ने नीरव मोदी के खिलाफ लुक आउट नोटस जारी किया ताकि नीरव मोदी से पूछताछ की जा सके, लेकिन नीरव कोई न कोई बहाना बनाकर टालता रहा। इसी बीच पता चलता है कि नीरव मोदी का मामा मेहुल चोकसी भी बिना किसी सिक्योरटी के फेक LOU के ज़रिए बैंकों को चूना लगा रहा है। 7 फरवरी 2018 को सीबीआई ने उसे ख़िलाफ़ भी FIR दज कर ली। 14 फरवरी 2018 को इसमें ईडी की एंट्री होती है और मामा-भांजे की सारी पोल खुल जाती है। ईडी की जांच में पता चलता है क नीरव मोदी बैंक के कुछ करप्ट अधिकारियों के साथ मिलकर, हीरे और ज्वैलरी खरीदने के नाम पर बिना किसी कोलेटरल के LOUs लेता था। कागजों पर ये दिखाया जाता कि करोड़ों रुपये के हीरे-मोती फलां-फलां विदेशी कंपनियों से खरीदे गए हैं। लेकन असलियत में जिन कंपनियों से खरीद दिखाई गई, वे शेल कंपनियाँ थीं, जिन्हें ख़ुद नीरव मोदी ने खड़ा कया था। मतलब असल में न ही कोई माल इधर से उधर होता था, न कोई ट्रेड होता था। सबकुछ फाइलों और कागजों पर होता और बैंक का पैसा घूमकर नीरव मोदी की जेब में चला जाता। लेकिन जबतक ये बात ईडी को पता चली बहुत देर हो चुकी थी। नीरव मोदी अपने भाई निहाल मोदी के साथ मिलकर इन शेल कंपनियों के डमी डायरेक्टर्स के मोबाइल जब्त कराके तुड़वा देता है। और डमी डायरेक्टर्स को इिजप्ट शिफ्ट करा देता है। इसके बाद ईडी 15 फरवरी को नीरव मोदी की कुल 17 प्रॉपर्टियों पर रेड मारती है और सभी प्रॉपर्टियों को जब्त कर लेती है। दावा किया गया कि नीरव मोदी की 5100 करोड़ की संपत्ति को जब्त कर लिया गया है। इसके बाद ED ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा कि नीरव मोदी और मेहुल चौकसी का पासपोर्ट रद्द किया जाए।

14 फरवरी 2018 को जैसे ही घोटाले की खबर बाहर आई, देश में हड़कंप मच गया। 34 बैंकों की मार्केट कैप में करीब 36,000 करोड़ रुपये की गिरावट आ गई। सिर्फ PNB के स्टॉक्स ने ही इन्वेस्टर्स का करीब 8,000 करोड़ रुपये डुबो दिए। जिन बैंकों ने नीरव को फेक LoU पर लोन दिया था UCO Bank, Allahabad Bank, Axis Bank, Union Bank of India और SBI उन पर सबसे ज्यादा मार पड़ी। डायमंड इंडस्ट्री में भी 10% तक की गिरावट आई। बैंकों ने सारे के सारे डायमंड ट्रेडर्स के बिजनेस लोंस को रिस्ट्रिक्ट कर दिया। एक्सपोर्ट-इंपोर्ट इंडस्ट्री के लिए LoUs बेहद जरूरी थे, क्योंकि इनके जरिए कम इंट्रेस्ट पर शॉर्ट-टर्म क्रेडिट मिल जाता था। लेकिन नीरव मोदी के लालच की कीमत पूरी इंडस्ट्री को उठानी पड़ी। महीनेभर बाद 13 मार्च 2018 को RBI ने एक नोटिस जारी कर बैंकों के LoU जारी करने पर बैन लगा दिया। साथ ही, निर्देश दिया कि वे SWIFT सिस्टम को अपने CBS के साथ जोड़ें, ताकि फ्युचर में इस तरह के फ्रॉड से बचा जा सके। RBI ने बैंकों को निर्देश दिया कि SWIFT सिस्टम का इस्तेमाल पहले से ज्यादा सख्ती से किया जाए। जिन पेमेंट्स में फॉरेन करंसी किसी इंडिविजुअल को भेजी जा रही हो, उन पर लिमिट लगा दी गई। और बड़े अमाउंट वाली ट्रांजैक्शन्स पर एक्स्ट्रा सिक्योरिटी लेयर लगाया जाए, ताकि कोई भी गड़बड़ी तुरंत पकड़ में आ जाए। नेशनल फाइनेंसियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी बना के ऑडिटिंग के पूरे प्रोसेस को भी चेंज किया गया। 21 अप्रैल 2018 को Fugitive Economic Offenders Act 2018 लागू किया गया। मकसद ये था कि जो लोग भारी-भरकम फ्रॉड करके देश से भाग जाते हैं, वो आसानी से बच न सकें। एक्ट में कोर्ट को ये ताकत दी गई कि ऐसे अपराधियों की सारी प्रॉपर्टी और एसेट्स जब्त कर लिए जाएं। RBI ने एक एक्सपर्ट कमेटी भी बनाई। इस कमेटी का काम ये पता लगाना था कि आखिर बैंकों में एसेट क्लासिफिकेशन में इतना बड़ा डिफ्रेंस क्यों आ रहा, अलग-अलग तरह की धोखाधड़ी कैसे हो रही है? और आगे इस तरह के फ्रॉड को रोकने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाने चाहिए। आरबीआई ने कई बैंकों पर प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन फ्रेमवर्क भी लागू किया ताकि बैंक जोखिम वाली ऐक्टिविटीज से दूर रहें।

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mohitt

पत्रकारिता का विद्यार्थी